रोहतक : डायबिटीज से पीड़ित मरीजों की देखभाल को बेहतर बनाने के लिए मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग में आज डायबिटिक फुट केयर को लेकर एक जागरूकता सत्र का आयोजन किया। इस सत्र का नेतृत्व मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के वैस्कुलर व एंडोवैस्कुलर सर्जरी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और प्रभारी डॉ. अचिंत्य शर्मा ने किया।
इस पहल का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और यह समझाना था कि डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के लिए पैरों की देखभाल, चोटों से बचाव और चलने-फिरने की क्षमता को बनाए रखना कितना जरूरी है, ताकि पैर को काटने (एम्प्यूटेशन) जैसी स्थिति से बचा जा सके। यदि डायबिटिक फुट की जटिलताओं का समय पर इलाज न किया जाए, तो ये गंभीर संक्रमण, अल्सर और कई बार पैर काटने जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती हैं।
डायबिटिक फुट केयर के महत्व को समझाते हुए मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के वैस्कुलर व एंडोवैस्कुलर सर्जरी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और प्रभारी डॉ. अचिंत्य शर्मा ने कहा, “डायबिटीज से ग्रस्त लोगों में न्यूरोपैथी, खराब रक्त संचार और प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी के कारण पैरों से संबंधित समस्याओं का खतरा अधिक होता है। हमने हाल ही में मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग में समर्पित डायबिटिक फुट केयर क्लिनिक की शुरुआत की है। यह नया क्लिनिक विशेष रूप से डायबिटिक मरीजों के लिए तैयार किया गया है, जिसमें पैरों के अल्सर की देखभाल, संक्रमण प्रबंधन और वैस्कुलर जांच जैसी सेवाएं शामिल हैं, ताकि पैरों की सेहत सुनिश्चित की जा सके। इस क्लिनिक में उन्नत जांच, विशेषज्ञों की सलाह और व्यक्तिगत उपचार की सुविधा उपलब्ध है, जो संक्रमण और संभावित एम्प्यूटेशन के खतरे को कम करने में मदद करती है।”
डॉ. अचिंत्य ने आगे बताया, “डायबिटिक फुट की समस्याएं, जैसे अल्सर, संक्रमण, न्यूरोपैथी, चार्कोट फुट और खराब ब्लड सर्कुलेशन, यदि समय पर नियंत्रित न की जाएं तो ये काफी गंभीर हो सकती हैं। शुरुआती लक्षणों में सुन्नता, दर्द, न भरने वाले घाव, सूजन, त्वचा में बदलाव और पैरों का आकार बिगड़ना शामिल है। इन समस्याओं से बचने के लिए रोज़ाना देखभाल ज़रूरी है—पैरों का निरीक्षण करें, धोएं और मॉइस्चराइज़ करें, नाखून सावधानी से काटें, सही जूते और मोज़े पहनें, नंगे पांव चलने से बचें और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें। धूम्रपान से बचें, पैरों को गर्म करने से बचें और बेहतर रक्त संचार के लिए उन्हें ऊपर उठाकर रखें। नियमित रूप से पैरों की जांच कराएं और अगर घाव ठीक न हो रहा हो, लालिमा फैल रही हो, त्वचा काली पड़ जाए या दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। शुरुआती इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव है और चलने-फिरने की क्षमता लंबे समय तक बनी रहती है।”
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग में डायबिटिक फुट क्लिनिक की शुरुआत इस बात का प्रमाण है कि अस्पताल मधुमेह से जुड़ी समग्र देखभाल को लेकर प्रतिबद्ध है। अत्याधुनिक जांच सुविधाओं और समर्पित टीम के साथ यह क्लिनिक मरीजों को डायबिटिक फुट की समस्याओं के लिए व्यापक जांच और व्यक्तिगत देखभाल प्रदान करता है, जिससे उनके स्वास्थ्य परिणाम बेहतर हों और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो।