रोहतक की विशेष अदालत (फास्ट ट्रैक / पोक्सो कोर्ट) ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म के गंभीर मामले में त्वरित न्याय सुनाते हुए दोषियों को 20-20 साल के कठोर कारावास (सश्रम कारावास) की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों पर भारी अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना राशि अदा न करने की स्थिति में दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बच्चों के खिलाफ होने वाले ऐसे जघन्य अपराध समाज की अंतरात्मा को झकझोरते हैं और ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।
पूरा घटनाक्रम:
मामला वर्ष 2024 का है। पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, 11वीं कक्षा में अध्ययनरत पीड़िता ने बताया था कि आरोपी चाचा पिछले दो-तीन वर्षों से उसे लगातार परेशान कर रहा था। अप्रैल 2024 में आरोपी पुराने मकान में पंखा लगवाने का बहाना बनाकर पीड़िता को अपने साथ ले गया। वहां उसने सुनसान स्थान पर पीने के पानी में नशीला पदार्थ मिलाकर पीड़िता को पिला दिया, जिससे वह अचेत हो गई। इसके बाद आरोपी ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। घटना के चलते पीड़िता गर्भवती हो गई थी।
मामले का विवरण
घटना एवं प्राथमिकी: पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर संबंधित थाने में पोक्सो अधिनियम (POCSO Act) और भारतीय दंड संहिता/भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
जांच एवं साक्ष्य: पुलिस द्वारा गहनता से जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट और पीड़िता के बयानों को अभियोजन पक्ष ने मजबूती से अदालत के समक्ष पेश किया।
फैसला: गवाहों के बयानों और प्रस्तुत पुख्ता सबूतों के आधार पर माननीय अदालत ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए 20-20 साल कैद तथा जुर्माने की सजा मुकर्रर की। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि में से एक हिस्सा पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिया जाए।