
अक्सर देखने में आता है कि कैंसर तो बहुत बड़ी बीमारी है, लोग डर के मारे अपना ब्लड प्रेशर और शुगर तक की जांच नहीं कराते कि कहीं लंबी दवाई न खानी पड़े और यही मानसिक तनाव और डर लोगों की बीमारी को बढ़ा रहा है। लोग बीमारी को छुपाने की कोशिश करते हैं और यहीं पर हम मात खा जाते हैं। यह कहना है पैथोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं कॉन्फ्रेंस के आयोजन सचिव डॉ. संजय कुमार का।
पीजीआईएमएस रोहतक में चल रही दो दिवसीय ब्रेस्ट पैथोलॉजी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस एवं वर्कशॉप के दूसरे दिन रविवार को डॉ. संजय कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मीडिया की इसमें अहम भूमिका है लोगों को जागरूक करने में। उन्होंने कहा कि कैंसर से डरना नहीं है, लड़ना है। लोगों को डर रहता है पता नहीं डॉक्टर क्या बता देंगे। कैंसर तो बहुत दूर की बात है, लोग अपना बीपी तक चेक नहीं करवाना चाहते।
डॉ. संजय ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में कैंसर की पहचान और उसकी मैनेजमेंट कैसे करनी है, इस पर रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, ऑन्को सर्जरी, रेडियोलॉजी और पैथोलॉजिस्ट सभी ने एक मंच पर पैनल डिस्कशन किया। हरियाणा क्षेत्र में ब्रेका-1 और ब्रेका-2 के अलावा किस टाइप का कैंसर आ रहा है इस पर भी मंथन हुआ। विदेशों से आए चिकित्सकों ने बताया कि कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल के मार्गदर्शन में विदेशों की अपेक्षा लिमिटेड रिसोर्सेज में भी पीजीआईएमएस बहुत अच्छा काम कर रहा है।
डॉ. संजय ने महिलाओं को सलाह देते हुए कहा कि हर महिला को माहवारी के एक हफ्ते बाद अपने ब्रेस्ट को जरूर चेक करना चाहिए।
आयोजन अध्यक्ष डॉ. सुनीता सिंह ने बताया कि महिलाओं को 4-5 दिन में नहाते समय अपने ब्रेस्ट को चेक करना चाहिए। हाई रिस्क वाली महिलाओं को डॉ. की सलाह पर साल में एक बार एमआरआई करवानी चाहिए। पीजीआईएमएस अब जींस पर काम शुरू कर रहा है ताकि मॉलिक्यूलर लेवल पर हम काफी आगे बढ़ पाएं, इससे टारगेटेड थेरेपी में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि ट्यूमर की ग्रेडिंग कैसे होती है और पैथोलॉजिस्ट की कैंसर का नाम देने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आज स्लाइड के माध्यम से प्रैक्टिकल तौर पर समझाया गया कि कौन सी गांठ कैंसर है और कौन सी फॉल्स है। मार्कर और बायोप्सी पर ध्यान देना ही सटीक इलाज की कुंजी है।
डॉ सुनीता सिंह ने बताया कि ब्रेस्ट पैथोलॉजी पर मल्टीडिसिप्लिनरी पैनल डिस्कशन का आयोजन हुआ, जिसमें सभी विभागों के विचारों का आदान-प्रदान हुआ। पैनल के मॉडरेटर डॉ. संजीव पराशर रहे, जबकि पैनलिस्ट के तौर पर डॉ. ज्योत्सना सेन, डॉ. नित्याशा, डॉ. कमलजीत सिंह, डॉ. श्यामा जैन, डॉ. संजय बदेसरा, डॉ. केशव गर्ग और डॉ. अग्रिमा ने भाग लिया।
डॉ. निशा मारवाह ने कहा कि लोगों में धारणा है कि ब्रेस्ट निकलवाने के बाद कैंसर खत्म हो जाता है, जबकि कई बार ब्रेस्ट टिश्यू रह जाता है।
डॉ. रजनीश कालरा ने कहा कि कैंसर की जरा सी भी शंका लगे तो झोलाछाप डॉक्टर के पास न जाकर विशेषज्ञ डॉक्टर को ही दिखाएं, शुरुआती स्टेज में इलाज से कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है।
इस अवसर पर डॉ मंजूनाथ बी सी, डॉ. रजनीश कालरा, डॉ. वीना गुप्ता, डॉ. मीनू गिल, डॉ. सतप्रकाश कटारिया, डॉ. सुमिति गुप्ता, डॉ. सोनिया छाबड़ा, डॉ. मोनिका गुप्ता, डॉ. प्रोमिल जैन, डॉ. रेणुका वर्मा, डॉ. रिचा, डॉ. उषा भी उपस्थित रहे।
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*बॉक्स-1 : कॉन्फ्रेंस के लिए 5 देशों का 12000 किमी का सफर कर 36 घंटे बाद पहुंची रोहतक, लोब्यूलर कार्सिनोमा पर दिया लेक्चर*
कॉन्फ्रेंस में खास आकर्षण रहीं पीजीआईएमएस रोहतक की ही पूर्व छात्रा डॉ. विदु कौशिक, जो अब अमेरिका में कंसल्टेंट पैथोलॉजिस्ट हैं। डॉ. विदु अपने जूनियर्स को नई तकनीक बताने के लिए 5 देशों का सफर कर 36 घंटे की लंबी यात्रा तय करके अमेरिका से रोहतक पहुंचीं और उन्होंने लोब्यूलर कार्सिनोमा ब्रेस्ट पर विशेष लेक्चर दिया।
वे 2015 से ओएसएफ सेंट फ्रांसिस मेडिकल सेंटर, पियोरिया, अमेरिका में कंसल्टेंट पैथोलॉजिस्ट के तौर पर कार्यरत हैं, जहां एनाटॉमिक और क्लीनिकल पैथोलॉजी, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और हेपेटोबिलियरी पैथोलॉजी, साइटोपैथोलॉजी और जेनिटोरिनरी पैथोलॉजी में विशेषज्ञता रखती हैं।
डॉ. विदु ने कहा कि अमेरिका में एक डॉक्टर एक दिन में 10 मरीज देखता है तो उसे बहुत ज्यादा माना जाता है। वहां एक मरीज पर 30 से 60 मिनट लगाए जाते हैं। भारत में इतने कम रिसोर्सेज में बहुत ज्यादा अच्छा काम हो रहा है, यहां सरकार काफी सुविधाएं दे रही है।
*बॉक्स-2 : इन्होंने निभाई कॉन्फ्रेंस में अहम भूमिका*
डॉ. सुनीता सिंह और डॉ. संजय कुमार ने बताया कि कॉन्फ्रेंस के सफल आयोजन में डॉ मंजूनाथ बी सी, डॉ. रजनीश कालरा, डॉ. वीना गुप्ता, डॉ. मीनू गिल, डॉ. सतप्रकाश कटारिया, डॉ. सुमिति गुप्ता, डॉ. सोनिया छाबड़ा, डॉ. मोनिका गुप्ता, डॉ. प्रोमिल जैन, डॉ. रेणुका वर्मा, डॉ. रिचा, डॉ. उषा ने अहम भूमिका निभाई।