मंडियों में किसानों की लूट बर्दाश्त नहीं: संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर रोहतक मार्केट कमेटी कार्यालय पर जड़ा ताला

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मंडियों में किसानों की लूट बर्दाश्त नहीं: संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर रोहतक मार्केट कमेटी कार्यालय पर जड़ा ताला

24 क्विंटल प्रति एकड़ की खरीद सीमा और नमी के नाम पर कटौती तुरंत रद्द करे सरकार: किसान संगठन

MSP से नीचे फसल बिकने और ‘जे-फॉर्म’ की धांधली पर फूटा किसानों का गुस्सा, बड़े आंदोलन की चेतावनी

रोहतक।

मंडियों में फसलों की खरीद में हो रही धांधली, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे खरीद और सरकार द्वारा थोपी जा रही मनमानी शर्तों के खिलाफ आज किसानों का आक्रोश फूट पड़ा। संयुक्त किसान मोर्चा और हरियाणा किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के प्रदेशव्यापी आह्वान के तहत आज रोहतक में मार्केट कमेटी कार्यालय का घेराव कर तालाबंदी की गई। प्रदर्शनकारी किसानों और मजदूर संगठनों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

सभा को संबोधित करते हुए किसान नेत्री मोनिका ने कहा कि मौजूदा सरकार पूरी तरह संवेदनहीन हो चुकी है, जिसे जगाने के लिए बार-बार सड़कों पर उतरना पड़ता है। उन्होंने कहा, “एक छोटा दुकानदार भी 5 रुपये के बिस्कुट का दाम खुद तय करता है, लेकिन हाड़-तोड़ मेहनत करने वाला किसान अपने उत्पाद का भाव तय नहीं कर सकता। सरकार कहने को धान का रेट 2300 रुपये से अधिक तय करती है, लेकिन मंडियों में किसान की उपज 1800 से 1900 रुपये में पिट रही है। मंडियों में खुले आसमान के नीचे पड़ी फसलों को ढकने तक का प्रबंध नहीं है।”

किसान मजदूर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ने मंडियों में किसानों के शोषण के लिए बनाई गई नीतियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने धान खरीद की सीमा 24 क्विंटल प्रति एकड़ तय कर रखी है, जबकि रोहतक और आसपास के क्षेत्रों में पैदावार 34 से 40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। ऐसे में किसान अपनी बची हुई उपज लेकर कहां जाए? इसके अलावा 17 से 22 प्रतिशत नमी (मॉइस्चर) का बहाना बनाकर किसानों से औने-पौने दामों पर खरीद की जा रही है, जबकि वही फसल बाद में सरकारी बोरों में भरकर ऊंचे दामों पर बेची जाती है। उन्होंने ‘जे-फॉर्म’ में हो रही धांधली को उजागर करते हुए मांग की कि खरीद के तुरंत बाद वास्तविक भुगतान का जे-फॉर्म कटे और किसानों से बाद में पैसे वापस मांगने की लूट पर तुरंत रोक लगे।

किसान सभा के सचिव और संयुक्त किसान मोर्चा के नेता उमेश दलाल ने कहा कि सरकार ने मंडियों में तुगलकी फरमान जारी कर रखे हैं—चाहे वह एक जिले की बाध्यता हो, 24 क्विंटल की लिमिट हो या मशीनों के संचालन के सीमित घंटे। ये तमाम शर्तें केवल किसान को परेशान करने और व्यापारियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं।

किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने खरीद की सीमा बढ़ाने, नमी के नाम पर हो रही लूट रोकने और MSP पर पूरी फसल की खरीद सुनिश्चित करने के लिए तुरंत कदम नहीं उठाए, तो आज की बैठक के समापन पर कड़े फैसले लेकर प्रदेश स्तर पर एक और बड़े आर-पार के आंदोलन का बिगुल फूंका जाएगा।

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