विपक्ष के नेता राहुल गांधी और 300 सांसदों को चुनाव आयोग से मिलने से रोकना अलोकतांत्रिक: भुक्कल
हरियाणा में वोट काटे गए और फर्जी नाम जोड़े गए, वोट के अधिकार की लड़ाई जारी रहेगी
जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं और मीडिया पर पुलिसिया कार्रवाई निंदनीय
हरियाणा की पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री गीता भुक्कल ने रोहतक में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान केंद्र की भाजपा सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार द्वारा देश में लोकतंत्र की बुनियादी मर्यादाओं को दरकिनार कर संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है।
सांसदों और युवाओं के साथ दुर्व्यवहार की निंदा
पूर्व मंत्री ने कहा कि भारत के संविधान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा, “विपक्ष के नेता राहुल गांधी जी, जो एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर हैं, और 300 सांसद जब मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने जाना चाहते थे, तो उन्हें मिलने का समय तक नहीं दिया गया। उनके रास्ते में बैरिकेडिंग कर दी गई और पुलिस प्रशासन ने उनके साथ अशोभनीय व्यवहार किया, जिसकी हम कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।” उन्होंने कहा कि राहुल गांधी स्पष्ट कर चुके हैं कि जनता के अधिकारों के लिए दर्ज होने वाली एफआईआर हमारे लिए मेडल के समान हैं और वोट के अधिकार की यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
वोट चोरी और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल
हरियाणा विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए गीता भुक्कल ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कांग्रेस पूर्ण बहुमत से सरकार बनाती, लेकिन सुनियोजित तरीके से वैध वोट काटे गए, गलत फोटो के साथ फर्जी नाम दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि करोड़ों नागरिकों के वोट का अधिकार छीनना सीधे तौर पर संविधान पर हमला है। चुनाव आयोग की आंतरिक स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टों से भी यह स्पष्ट हो चुका है कि दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग के निर्णयों पर 14 बार ‘डिसेंट नोट’ (असहमति पत्र) दर्ज कराए हैं, जो संस्था की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
युवाओं की बेरोजगारी और जंतर-मंतर की घटना पर आक्रोश
जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल है। इसके बावजूद दिल्ली में ट्रेनों और इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदियां लगाकर पुलिस बल के जरिए युवाओं की आवाज दबाई गई। भाजपा द्वारा युवाओं पर अराजकता फैलाने के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि देश के NET, JRF, पीएचडी धारक और गोल्ड मेडलिस्ट युवा नौकरियों के लिए अदालतों के चक्कर काट रहे हैं और सरकार उनकी सुध लेने के बजाय दमनकारी नीति अपना रही है।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार
पूर्व मंत्री ने मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ आज दबाव में है। जमीनी हकीकत दिखाने वाले पत्रकारों को भी हिरासत में लिया जाना इस बात का प्रमाण है कि सरकार सच को दबाना चाहती है।