हरियाणा सरकार द्वारा निजी बसों को बड़े पैमाने पर रूट परमिट जारी करने और निजीकरण की नीतियों के विरोध में आज रोहतक डिपो में रोडवेज कर्मचारियों ने पूर्ण हड़ताल कर दी। रोडवेज संयुक्त कर्मचारी मोर्चा एवं वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार करते हुए डिपो से बसों का संचालन पूरी तरह ठप कर दिया। बस स्टैंड पर सुबह से ही एक भी सरकारी बस बाहर नहीं निकली, जिससे दिल्ली, चंडीगढ़, हिसार, पानीपत और अन्य स्थानीय रूटों पर सफर करने वाले दैनिक यात्रियों, विद्यार्थियों व महिलाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
कर्मचारियों ने बस स्टैंड परिसर में सरकार और परिवहन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया।
मुख्य आपत्तियां एवं कर्मचारियों की मांगें:
* निजी परमिट रद्द हों: सरकार द्वारा प्रदेशभर के विभिन्न रूटों पर हजारों की संख्या में निजी बसों को परमिट बांटने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए।
* सरकारी बेड़े का विस्तार: निजी बसों और किलोमीटर स्कीम की जगह हरियाणा रोडवेज के अपने बेड़े में नई सरकारी बसें शामिल की जाएं।
* जनहित और रियायती सुविधाएं: निजी ऑपरेटरों की बसों में छात्रों, बुजुर्गों और 40 से अधिक श्रेणियों को मिलने वाली रियायती व मुफ्त यात्रा सुविधाएं नहीं मिलतीं, जिससे आम जनता पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ेगा।
* स्थायी रोजगार: सरकारी बसें बढ़ने से प्रदेश के हजारों बेरोजगार युवाओं के लिए चालक, परिचालक और तकनीकी पदों पर पक्के रोजगार के अवसर बनेंगे।
यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने निजीकरण की दिशा में उठाए जा रहे कदमों और निजी परमिट जारी करने के फैसले को तुरंत वापस नहीं लिया, तो यह आंदोलन राज्य स्तर पर और उग्र किया जाएगा। रोडवेज कर्मियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि जनहित और रोडवेज के अस्तित्व को बचाने के लिए यह संघर्ष आर-पार की लड़ाई तक जारी रहेगा।