
हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन (रजि. नं. 1) से जुड़े कर्मचारियों ने निजीकरण की नीतियों के विरोध में और पूर्व में मानी गई मांगों को लागू न करने के खिलाफ राज्यभर के सभी बस डिपो पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
यूनियन ने परिवहन मंत्री, हरियाणा सरकार को ज्ञापन भेजकर दो-टूक चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई और सहमति बनी मांगों का पत्र जारी नहीं हुआ, तो कर्मचारी उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।
मुख्य बिंदु एवं आरोप:
समझौते की अनदेखी: 16 अगस्त को परिवहन मंत्री एवं उच्चाधिकारियों के साथ हुई वार्ता में कर्मचारियों की कई मांगों पर सहमति बनी थी तथा 500 नई सरकारी बसें खरीदने का आश्वासन मिला था। साथ ही 40 दिन बाद दोबारा समीक्षा बैठक तय हुई थी।
निजी परमिटों पर रोष: यूनियन का आरोप है कि सरकार ने अपने वादों के विपरीत 1 सितंबर से निजी बसों को परमिट देने का फैसला ले लिया है और सभी जिलों में निजी बस परमिट के फॉर्म भरवाए जा रहे हैं।
डिपो स्तर पर प्रदर्शन: सरकार के इस एकतरफा फैसले के खिलाफ 3 सितंबर को यूनियन की राज्य कार्यकारिणी की आपातकालीन बैठक बुलाई गई, जिसमें 4 सितंबर को हरियाणा रोडवेज के सभी डिपो पर विरोध-प्रदर्शन कर निजीकरण पर रोक लगाने की मांग करने का निर्णय लिया गया।
“सरकार बातचीत में मांगों पर सहमति जताने के बाद भी धरातल पर निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। यदि जल्द ही मानी गई मांगों का पत्र जारी कर अगली बैठक की तिथि तय नहीं की गई और निजी परमिट तुरंत प्रभाव से रद्द नहीं किए गए, तो रोडवेज कर्मचारी सड़कों पर उतरकर आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।”