
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक ने एकेडमिक सहयोग और विस्तार की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल की विशेष पहल और मार्गदर्शन में बुधवार को यूएचएसआर और गुरुग्राम विश्वविद्यालय, गुरुग्राम के बीच अकादमिक, क्लीनिकल ट्रेनिंग और रिसर्च सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय में आयोजित गरिमामय एमओयू साइनिंग सेरेमनी में दोनों विश्वविद्यालयों के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया। गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर संजय कौशिक ने बताया कि इस एमओयू से हरियाणा के सैकड़ों साइकोलॉजी छात्रों को अब क्लीनिकल ट्रेनिंग के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा और उन्हें अपने ही प्रदेश के सबसे बड़े मेडिकल विश्वविद्यालय में सीखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि पीजीआई कुलपति डॉ एच के अग्रवाल के दिशा निर्देशन में नित नए आयाम स्थापित कर रहा है। आज यह एमओयू साइन करके डॉ अग्रवाल ने बता दिया कि यह विश्वविद्यालय पूरे प्रदेश में अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए तत्पर है।
गुरुग्राम विश्वविद्यालय की डीन प्रो. गायत्री रैना ने इस एमओयू पर खुशी जताते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक समझौते से हमारे विश्वविद्यालय के साइकोलॉजी के छात्रों को पीजीआईएमएस रोहतक जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में वास्तविक मरीजों पर काम करने का सुनहरा अवसर मिलेगा, जिससे उनका क्लीनिकल अनुभव और रोजगार की संभावनाएं दोनों कई गुना बढ़ जाएंगी।
यूएचएसआर की ओर से कुलसचिव डॉ. रूप सिंह, पीजीआईएमएस के निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल, डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ एम जी वशिष्ठ, डीन पीजीआईएमएस डॉ अशोक चौहान, चिकित्सा अधीक्षक डॉ कुंदन मित्तल,प्राचार्य पीजीआईडीएस डॉ मनु राठी विशेष रूप से उपस्थित रहे। वहीं गुरुग्राम विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. संजय कौशिक के नेतृत्व में दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल यूएचएसआर पहुंचा, जिसमें उनके साथ फैकल्टी ऑफ सोशल साइंसेज एंड एजुकेशन की डीन प्रो. गायत्री रैना शामिल थीं।
बॉक्स : मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा एमओयू: कुलपति डॉ. अग्रवाल
कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि यह एमओयू केवल दो विश्वविद्यालयों के बीच का करार नहीं है, बल्कि हरियाणा में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक दूरगामी कदम है। उन्होंने कहा कि आज के समय में तनाव, अवसाद, नशा और अन्य मानसिक समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, ऐसे में कुशल क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट की देश को सख्त जरूरत है।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि पीजीआईएमएस रोहतक का मनोरोग विभाग और स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ पूरे उत्तर भारत में मानसिक रोगियों का सबसे बड़ा केंद्र है, जहां हर रोज सैकड़ों मरीज ओपीडी और आईपीडी में आते हैं। यहां गुरूग्राम विश्वविद्यालय के छात्रों को सिजोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर, डिप्रेशन, बच्चों और नशे से संबंधित मानसिक बीमारियों के विविध केसों को प्रत्यक्ष रूप से देखने और सीखने का मौका मिलेगा, जो किसी भी किताब से बड़ा अनुभव होगा। डॉ अग्रवाल ने आश्वासन दिया कि यूएचएसआर गुरुग्राम विश्वविद्यालय के छात्रों को हर संभव सहयोग देगा और भविष्य में दोनों विश्वविद्यालय संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट और कॉन्फ्रेंस भी आयोजित करेंगे।
बॉक्स: पीजीआईएमएस की क्लीनिकल क्षमता का लाभ मिलेगा
पीजीआईएमएस के निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने इस एमओयू का स्वागत करते हुए कहा कि पीजीआईएमएस रोहतक हमेशा से ही अकादमिक सहयोग के लिए तत्पर रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे पास अनुभवी मनोचिकित्सकों और क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट की एक मजबूत टीम है, जो इन प्रशिक्षुओं को गाइड करेगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की ट्रेनिंग से न केवल छात्रों की क्लीनिकल स्किल बढ़ेगी, बल्कि मरीजों को दी जाने वाली मनोवैज्ञानिक सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। यह समझौता राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को भी मजबूती देगा।
बॉक्स : कुलसचिव डॉ. रूप सिंह ने दी एमओयू की विस्तृत जानकारी
कुलसचिव डॉ. रूप सिंह ने बताया कि यह एमओयू पूरी तरह से नियमों और वित्तीय पारदर्शिता के साथ तैयार किया गया है। इसके तहत गुरुग्राम विश्वविद्यालय के आरसीआई से मान्यता प्राप्त चार पाठ्यक्रमों – एम.ए. क्लीनिकल साइकोलॉजी, बी.एससी. क्लीनिकल साइकोलॉजी ऑनर्स, प्रोफेशनल डिप्लोमा इन क्लीनिकल साइकोलॉजी और एम.एससी. साइकोलॉजी के छात्रों को यूएचएसआर में ट्रेनिंग की पोस्टिंग दी जाएगी।
डॉ रूप सिंह ने बताया कि समझौते के तहत यूएचएसआर की जिम्मेदारी होगी कि वह छात्रों को शेड्यूल्ड पोस्टिंग के माध्यम से इंटर्नशिप कराएगा और उन्हें साइकोलॉजिकल असेसमेंट, डायग्नोस्टिक प्रक्रियाओं और केस हिस्ट्री लेने का प्रशिक्षण देगा।